मानव:
मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ,
लेकिन सब कुछ असंतुलित क्यों लग रहा है?
प्रकृति:
क्योंकि तुमने गति तो बढ़ाई,
पर दिशा को अनदेखा कर दिया।
मानव:
क्या अब भी कुछ सुधर सकता है?
प्रकृति:
हाँ,
अगर तुम सुनना सीखो,
और कम लेकर ज़्यादा संभालो।
मानव:
शुरुआत कहाँ से करूँ?
प्रकृति:
वहीं से,
जहाँ तुम खड़े हो —
आज से,
अभी से।